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महाभारत 4.42.26
आचार्या वै कारुणिकाः प्राज्ञाश्चापायदर्शिनःनैते महाभये प्राप्ते संप्रष्टव्याः कथंचन
ācāryā vai kāruṇikāḥ prājñāścāpāyadarśinaḥnaite mahābhaye prāpte saṃpraṣṭavyāḥ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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