महाभारत 4.42.3
पराजितैर्हि वस्तव्यं तैश्च द्वादश वत्सरान्वने जनपदेऽज्ञातैरेष एव पणो हि नः
parājitairhi vastavyaṃ taiśca dvādaśa vatsarānvane janapade'jñātaireṣa eva paṇo hi naḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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