महाभारत 4.44.8
एको गन्धर्वराजानं चित्रसेनमरिंदमःविजिग्ये तरसा संख्ये सेनां चास्य सुदुर्जयाम्
eko gandharvarājānaṃ citrasenamariṃdamaḥvijigye tarasā saṃkhye senāṃ cāsya sudurjayām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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