महाभारत 4.45.15
त्वं पुनः पण्डितो भूत्वा वाचं वक्तुमिहेच्छसिवैरान्तकरणो जिष्णुर्न नः शेषं करिष्यति
tvaṃ punaḥ paṇḍito bhūtvā vācaṃ vaktumihecchasivairāntakaraṇo jiṣṇurna naḥ śeṣaṃ kariṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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