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महाभारत 4.45.26
युध्यतां काममाचार्यो नाहं योत्स्ये धनंजयम्मत्स्यो ह्यस्माभिरायोध्यो यद्यागच्छेद्गवां पदम्
yudhyatāṃ kāmamācāryo nāhaṃ yotsye dhanaṃjayammatsyo hyasmābhirāyodhyo yadyāgacchedgavāṃ padam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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