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महाभारत 4.49.14
रथर्षभास्ते तु रथर्षभेण; वीरा रणे वीरतरेण भग्नाःचकम्पिरे वातवशेन काले; प्रकम्पितानीव महावनानि
ratharṣabhāste tu ratharṣabheṇa; vīrā raṇe vīratareṇa bhagnāḥcakampire vātavaśena kāle; prakampitānīva mahāvanāni
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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