महाभारत 4.49.5
गजो गजेनेव मया दुरात्मा; यो योद्धुमाकाङ्क्षति सूतपुत्रःतमेव मां प्रापय राजपुत्र; दुर्योधनापाश्रयजातदर्पम्
gajo gajeneva mayā durātmā; yo yoddhumākāṅkṣati sūtaputraḥtameva māṃ prāpaya rājaputra; duryodhanāpāśrayajātadarpam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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