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महाभारत 4.5.17
तदुदारं महाघोषं सपत्नगणसूदनम्अपज्यमकरोत्पार्थो गाण्डीवमभयंकरम्
tadudāraṃ mahāghoṣaṃ sapatnagaṇasūdanamapajyamakarotpārtho gāṇḍīvamabhayaṃkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतदुदारं महाघोषं सपत्नगणसूदनम्अपज्यमकरोत्पार्थो गाण्डीवमभयंकरम्
tadudāraṃ mahāghoṣaṃ sapatnagaṇasūdanamapajyamakarotpārtho gāṇḍīvamabhayaṃkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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