महाभारत 4.5.24
खड्गांश्च पीतान्दीर्घांश्च कलापांश्च महाधनान्विपाठान्क्षुरधारांश्च धनुर्भिर्निदधुः सह
khaḍgāṃśca pītāndīrghāṃśca kalāpāṃśca mahādhanānvipāṭhānkṣuradhārāṃśca dhanurbhirnidadhuḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें