महाभारत 4.50.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
अपयाते तु राधेये दुर्योधनपुरोगमाःअनीकेन यथास्वेन शरैरार्च्छन्त पाण्डवम्
apayāte tu rādheye duryodhanapurogamāḥanīkena yathāsvena śarairārcchanta pāṇḍavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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