महाभारत 4.52.15
छिन्ने धनुषि पार्थेन सोऽन्यदादाय कार्मुकम्चकार गौतमः सज्यं तदद्भुतमिवाभवत्
chinne dhanuṣi pārthena so'nyadādāya kārmukamcakāra gautamaḥ sajyaṃ tadadbhutamivābhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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