महाभारत 4.53.7
तेनाहं योद्धुमिच्छामि महाभागेन संयुगेतस्मात्त्वं प्रापयाचार्यं क्षिप्रमुत्तर वाहय
tenāhaṃ yoddhumicchāmi mahābhāgena saṃyugetasmāttvaṃ prāpayācāryaṃ kṣipramuttara vāhaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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