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महाभारत 4.54.2
तयोर्देवासुरसमः संनिपातो महानभूत्किरतोः शरजालानि वृत्रवासवयोरिव
tayordevāsurasamaḥ saṃnipāto mahānabhūtkiratoḥ śarajālāni vṛtravāsavayoriva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतयोर्देवासुरसमः संनिपातो महानभूत्किरतोः शरजालानि वृत्रवासवयोरिव
tayordevāsurasamaḥ saṃnipāto mahānabhūtkiratoḥ śarajālāni vṛtravāsavayoriva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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