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महाभारत 4.62.11
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
उत्तरस्त्वरमाणोऽथ दूतानाज्ञापयत्ततःवचनादर्जुनस्यैव आचक्षध्वं जयं मम
uttarastvaramāṇo'tha dūtānājñāpayattataḥvacanādarjunasyaiva ācakṣadhvaṃ jayaṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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