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महाभारत 4.63.29
प्रस्थाप्य सेनां कन्याश्च गणिकाश्च स्वलंकृताःमत्स्यराजो महाप्राज्ञः प्रहृष्ट इदमब्रवीत्अक्षानाहर सैरन्ध्रि कङ्क द्यूतं प्रवर्तताम्
prasthāpya senāṃ kanyāśca gaṇikāśca svalaṃkṛtāḥmatsyarājo mahāprājñaḥ prahṛṣṭa idamabravītakṣānāhara sairandhri kaṅka dyūtaṃ pravartatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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