महाभारत 4.63.39
वाच्यावाच्यं न जानीषे नूनं मामवमन्यसेभीष्मद्रोणमुखान्सर्वान्कस्मान्न स विजेष्यति
vācyāvācyaṃ na jānīṣe nūnaṃ māmavamanyasebhīṣmadroṇamukhānsarvānkasmānna sa vijeṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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