महाभारत 4.63.3
तमासनगतं वीरं सुहृदां प्रीतिवर्धनम्उपतस्थुः प्रकृतयः समस्ता ब्राह्मणैः सह
tamāsanagataṃ vīraṃ suhṛdāṃ prītivardhanamupatasthuḥ prakṛtayaḥ samastā brāhmaṇaiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें