महाभारत 4.63.40
वयस्यत्वात्तु ते ब्रह्मन्नपराधमिमं क्षमेनेदृशं ते पुनर्वाच्यं यदि जीवितुमिच्छसि
vayasyatvāttu te brahmannaparādhamimaṃ kṣamenedṛśaṃ te punarvācyaṃ yadi jīvitumicchasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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