महाभारत 4.64.26
स निवृत्तो नरव्याघ्रो मुञ्चन्वज्रनिभाञ्शरान्सचिवैः संवृतो राजा रथे नाग इव श्वसन्
sa nivṛtto naravyāghro muñcanvajranibhāñśarānsacivaiḥ saṃvṛto rājā rathe nāga iva śvasan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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