महाभारत 4.64.31
इच्छामि तमहं द्रष्टुमर्चितुं च महाबलम्येन मे त्वं च गावश्च रक्षिता देवसूनुना
icchāmi tamahaṃ draṣṭumarcituṃ ca mahābalamyena me tvaṃ ca gāvaśca rakṣitā devasūnunā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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