महाभारत 4.64.8
यदि ह्येतत्पतेद्भूमौ रुधिरं मम नस्ततःसराष्ट्रस्त्वं महाराज विनश्येथा न संशयः
yadi hyetatpatedbhūmau rudhiraṃ mama nastataḥsarāṣṭrastvaṃ mahārāja vinaśyethā na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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