महाभारत 4.66.13
अनेन विद्धो मातङ्गो महानेकेषुणा हतःहिरण्यकक्ष्यः संग्रामे दन्ताभ्यामगमन्महीम्
anena viddho mātaṅgo mahānekeṣuṇā hataḥhiraṇyakakṣyaḥ saṃgrāme dantābhyāmagamanmahīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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