महाभारत 4.67.7
अभिषङ्गादहं भीतो मिथ्याचारात्परंतपस्नुषार्थमुत्तरां राजन्प्रतिगृह्णामि ते सुताम्
abhiṣaṅgādahaṃ bhīto mithyācārātparaṃtapasnuṣārthamuttarāṃ rājanpratigṛhṇāmi te sutām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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