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महाभारत 4.8.13
का त्वं ब्रूहि यथा भद्रे नासि दासी कथंचनयक्षी वा यदि वा देवी गन्धर्वी यदि वाप्सराः
kā tvaṃ brūhi yathā bhadre nāsi dāsī kathaṃcanayakṣī vā yadi vā devī gandharvī yadi vāpsarāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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