महाभारत 4.8.33
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवं कृष्णा विराटस्य भार्यया परिसान्त्वितान चैनां वेद तत्रान्यस्तत्त्वेन जनमेजय
evaṃ kṛṣṇā virāṭasya bhāryayā parisāntvitāna caināṃ veda tatrānyastattvena janamejaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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