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महाभारत 4.8.4
सा तानुवाच राजेन्द्र सैरन्ध्र्यहमुपागताकर्म चेच्छामि वै कर्तुं तस्य यो मां पुपुक्षति
sā tānuvāca rājendra sairandhryahamupāgatākarma cecchāmi vai kartuṃ tasya yo māṃ pupukṣati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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