महाभारत 5.101.19
स्थितो य एष पुरतः कौरव्यस्यार्यकस्य चद्युतिमान्दर्शनीयश्च कस्यैष कुलनन्दनः
sthito ya eṣa purataḥ kauravyasyāryakasya cadyutimāndarśanīyaśca kasyaiṣa kulanandanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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