महाभारत 5.101.24एतस्य हि पिता नागश्चिकुरो नाम मातलेनचिराद्वैनतेयेन पञ्चत्वमुपपादितःetasya hi pitā nāgaścikuro nāma mātalenacirādvainateyena pañcatvamupapāditaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें