महाभारत 5.103.14
कोऽन्यो भारसहो ह्यस्ति कोऽन्योऽस्ति बलवत्तरःमया योऽहं विशिष्टः सन्वहामीमं सबान्धवम्
ko'nyo bhārasaho hyasti ko'nyo'sti balavattaraḥmayā yo'haṃ viśiṣṭaḥ sanvahāmīmaṃ sabāndhavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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