महाभारत 5.108.2
अत्र पश्चादहः सूर्यो विसर्जयति भाः स्वयम्पश्चिमेत्यभिविख्याता दिगियं द्विजसत्तम
atra paścādahaḥ sūryo visarjayati bhāḥ svayampaścimetyabhivikhyātā digiyaṃ dvijasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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