महाभारत 5.111.3
सिद्धमन्नं तया क्षिप्रं बलिमन्त्रोपबृंहितम्भुक्त्वा तृप्तावुभौ भूमौ सुप्तौ तावन्नमोहितौ
siddhamannaṃ tayā kṣipraṃ balimantropabṛṃhitambhuktvā tṛptāvubhau bhūmau suptau tāvannamohitau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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