महाभारत 5.117.2
गालवस्तु वचः श्रुत्वा वैनतेयेन भाषितम्चतुर्भागावशिष्टं तदाचख्यौ कार्यमस्य हि
gālavastu vacaḥ śrutvā vainateyena bhāṣitamcaturbhāgāvaśiṣṭaṃ tadācakhyau kāryamasya hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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