महाभारत 5.119.24
अहं ते दुहिता राजन्माधवी मृगचारिणीमयाप्युपचितो धर्मस्ततोऽर्धं प्रतिगृह्यताम्
ahaṃ te duhitā rājanmādhavī mṛgacāriṇīmayāpyupacito dharmastato'rdhaṃ pratigṛhyatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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