महाभारत 5.121.14
तदनेनैव दोषेण क्षीणं येनासि पातितःअभिमानेन राजेन्द्र धिक्कृतः स्वर्गवासिभिः
tadanenaiva doṣeṇa kṣīṇaṃ yenāsi pātitaḥabhimānena rājendra dhikkṛtaḥ svargavāsibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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