महाभारत 5.122.13
प्राज्ञैः शूरैर्महोत्साहैरात्मवद्भिर्बहुश्रुतैःसंधत्स्व पुरुषव्याघ्र पाण्डवैर्भरतर्षभ
prājñaiḥ śūrairmahotsāhairātmavadbhirbahuśrutaiḥsaṃdhatsva puruṣavyāghra pāṇḍavairbharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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