महाभारत 5.122.46
न हीमे सर्वराजानः पर्याप्ताः सहितास्त्वयाक्रुद्धस्य भीमसेनस्य प्रेक्षितुं मुखमाहवे
na hīme sarvarājānaḥ paryāptāḥ sahitāstvayākruddhasya bhīmasenasya prekṣituṃ mukhamāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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