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महाभारत 5.122.49
अजेयो ह्यर्जुनः क्रुद्धः सर्वैरपि सुरासुरैःमानुषैरपि गन्धर्वैर्मा युद्धे चेत आधिथाः
ajeyo hyarjunaḥ kruddhaḥ sarvairapi surāsuraiḥmānuṣairapi gandharvairmā yuddhe ceta ādhithāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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