महाभारत 5.122.56
बाहुभ्यामुद्धरेद्भूमिं दहेत्क्रुद्ध इमाः प्रजाःपातयेत्त्रिदिवाद्देवान्योऽर्जुनं समरे जयेत्
bāhubhyāmuddharedbhūmiṃ dahetkruddha imāḥ prajāḥpātayettridivāddevānyo'rjunaṃ samare jayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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