महाभारत 5.123.26
वासुदेवेन तीर्थेन तात गच्छस्व संगमम्कालप्राप्तमिदं मन्ये मा त्वं दुर्योधनातिगाः
vāsudevena tīrthena tāta gacchasva saṃgamamkālaprāptamidaṃ manye mā tvaṃ duryodhanātigāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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