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महाभारत 5.125.26
यावद्धि सूच्यास्तीक्ष्णाया विध्येदग्रेण माधवतावदप्यपरित्याज्यं भूमेर्नः पाण्डवान्प्रति
yāvaddhi sūcyāstīkṣṇāyā vidhyedagreṇa mādhavatāvadapyaparityājyaṃ bhūmernaḥ pāṇḍavānprati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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