महाभारत 5.126.35
प्रत्यक्षमेतद्भवतां यद्वक्ष्यामि हितं वचःभवतामानुकूल्येन यदि रोचेत भारताः
pratyakṣametadbhavatāṃ yadvakṣyāmi hitaṃ vacaḥbhavatāmānukūlyena yadi roceta bhāratāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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