महाभारत 5.126.44
इति मत्वाब्रवीद्धर्मं परमेष्ठी प्रजापतिःवरुणाय प्रयच्छैतान्बद्ध्वा दैतेयदानवान्
iti matvābravīddharmaṃ parameṣṭhī prajāpatiḥvaruṇāya prayacchaitānbaddhvā daiteyadānavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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