महाभारत 5.128.37
यो न शक्यो बलात्कर्तुं देवैरपि सवासवैःतं त्वं प्रार्थयसे मन्द बालश्चन्द्रमसं यथा
yo na śakyo balātkartuṃ devairapi savāsavaiḥtaṃ tvaṃ prārthayase manda bālaścandramasaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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