महाभारत 5.128.49एकार्णवे शयानेन हतौ तौ मधुकैटभौजन्मान्तरमुपागम्य हयग्रीवस्तथा हतःekārṇave śayānena hatau tau madhukaiṭabhaujanmāntaramupāgamya hayagrīvastathā hataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें