महाभारत 5.132.32
उष्य सौवीरकन्याभिः श्लाघस्वार्थैर्यथा पुरामा च सैन्धवकन्यानामवसन्नो वशं गमः
uṣya sauvīrakanyābhiḥ ślāghasvārthairyathā purāmā ca saindhavakanyānāmavasanno vaśaṃ gamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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