महाभारत 5.136.21
विशेषत इहास्माकं निमित्तानि विनाशनेउल्काभिर्हि प्रदीप्ताभिर्वध्यते पृतना तव
viśeṣata ihāsmākaṃ nimittāni vināśaneulkābhirhi pradīptābhirvadhyate pṛtanā tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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