महाभारत 5.136.23
नगरं न यथापूर्वं तथा राजनिवेशनम्शिवाश्चाशिवनिर्घोषा दीप्तां सेवन्ति वै दिशम्
nagaraṃ na yathāpūrvaṃ tathā rājaniveśanamśivāścāśivanirghoṣā dīptāṃ sevanti vai diśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें