महाभारत 5.136.3
तत्करिष्यन्ति कौन्तेया वासुदेवस्य संमतम्न हि ते जातु शाम्येरन्नृते राज्येन कौरव
tatkariṣyanti kaunteyā vāsudevasya saṃmatamna hi te jātu śāmyerannṛte rājyena kaurava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें