महाभारत 5.138.2
किमब्रवीद्रथोपस्थे राधेयं परवीरहाकानि सान्त्वानि गोविन्दः सूतपुत्रे प्रयुक्तवान्
kimabravīdrathopasthe rādheyaṃ paravīrahākāni sāntvāni govindaḥ sūtaputre prayuktavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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