महाभारत 5.139.32
अनुयातश्च पितरमधिको वा पराक्रमेग्रावस्तोत्रं स सौभद्रः सम्यक्तत्र करिष्यति
anuyātaśca pitaramadhiko vā parākramegrāvastotraṃ sa saubhadraḥ samyaktatra kariṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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